नारी शक्ति समाज की संस्कृति और संस्कारों की संवाहक : पूर्णमति माताजी

गांधी रोड स्थित जैन धर्मशाला में आर्यिका रत्न 105 श्री पूर्णमति माताजी के सान्निध्य में जैन समाज की विभिन्न महिला मंडलों की ओर से ‘नारी शक्ति, समाज की संस्कृति’ विषय पर नारी संस्कार सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में नारी की सामाजिक भूमिका के साथ धर्म, संस्कार और संस्कृति को केंद्र में रखते हुए विभिन्न रचनात्मक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सांसद एवं उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा, विशिष्ट अतिथि कैंट विधायक सविता कपूर और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल मौजूद रहे। अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया।
लघु नाटिकाओं से दिया सामाजिक संदेश
सम्मेलन में विभिन्न महिला संस्थाओं की ओर से लघु नाटिकाओं और बैनर प्रस्तुतियों के माध्यम से धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक विषयों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। सती सीता की अग्नि परीक्षा, सोलह सतियां, सोलह शुद्धियां, संस्कार पाठशाला, धर्म में नारी का योगदान, नारी का श्रृंगार, संस्कारी नारी का महत्व, अष्टमंगल द्रव्य, भक्तामर स्तोत्र, आठ कर्म, वीरांगना झांसी की रानी और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषय प्रस्तुतियों का केंद्र रहे।
विद्या सिंधु बालिका मंडल, जैन मिलन महिला भाग्य ज्योति, माजरा मंदिर, दिगंबर जैन समाज विकासनगर, प्रगति परिवार, जैन मिलन राजुल, एकता एवं महिला मिलन माजरा, वीरांगना मंच शिवालिक, श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर क्लेमेंटाउन, मूकमाटी परिवार, जिनवाणी जागृति मंच और प्रभु समर्पण समिति समेत विभिन्न संस्थाओं ने कार्यक्रम में सहभागिता की। प्रस्तुतियों को अतिथियों और श्रद्धालुओं ने सराहा।
इस अवसर पर बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष गीता खन्ना, हिमाचल टाइम्स की संपादक एवं समाजसेवी इंद्राणी पांधी समेत विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया।
धर्म और संस्कारों को जीवन में अपनाने का आह्वान
आर्यिका रत्न 105 श्री पूर्णमति माताजी ने मंगल प्रवचन में कहा कि सम्मेलन में प्रस्तुत प्रत्येक कार्यक्रम से कोई न कोई सीख लेकर उसे जीवन में उतारना चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्कारों के बिना जीवन निराधार हो जाता है और धर्म ही जीवन का आधार है।
उन्होंने कहा कि भौतिक वस्तुएं केवल क्षणिक आनंद देती हैं, जबकि धर्म आत्मकल्याण और मोक्ष के मार्ग को प्रशस्त करता है। प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में धर्म, संस्कार और सदाचार को स्थान देना चाहिए। नारी शक्ति को समाज में संस्कार और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर आगे आना होगा।
मीडिया समन्वयक मधु सचिन जैन ने बताया कि सम्मेलन का समापन धर्म, संस्कार और समाज सेवा के संकल्प के साथ हुआ। कार्यक्रम में जैन समाज के पदाधिकारियों, श्री विद्या समय पूर्ण वर्षायोग समिति के सदस्यों सहित विकासनगर और अन्य क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।

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